जानिए – अस्थमा के लक्षण और कारण और ९ घरेलू उपचार

अस्थमा के लक्षण कारण और घरेलू उपचार
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अस्थमा के लक्षण कारण और घरेलू उपचार – अस्थमा सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बीमारी है। श्वासनली में रुकावट से सांस लेना मुश्किल हो जाता है, इसलिए सांस की तकलीफ होती है। और सीना धड़कने लगता है कभी-कभी ब्रोंकाइटिस और अस्थमा की पहचान करने में भ्रम होता है। कई बच्चों में ब्रोंकाइटिस सीने में जकड़न का कारण बनता है। हालांकि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो यह बीमारी नहीं होती है।

अस्थमा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी भी उम्र में हो सकता है। यह दस प्रतिशत बच्चों और पांच प्रतिशत वयस्कों को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर दस साल से कम उम्र के बच्चों और वयस्कों के पांच प्रतिशत को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर दस साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। लड़कों और लड़कियों के बीच का अनुपात आमतौर पर २:१ होता है।

दमा के लक्षण – Symptoms of Asthma

१) अस्थमा के लक्षण अस्थमा से पीड़ित बच्चा सांस लेने के लिए सचमुच संघर्ष करता है।

२) साँस लेने और साँस छोड़ना में ज़्यादा कठिनाई होतीं है।

३) ऐसा इसलिए है क्योंकि कफ छोटी श्वासनली में जमा हो जाता है। तो सांस मुश्किल से निकलती है।

४) सभी पीड़ितों को यह दिन के मुकाबले रात में ज्यादा दर्द करता है।

५) बच्चों को अक्सर बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है।

६) अस्थमा नियमित अंतराल पर होता है।

७) अस्थमा का बच्चा बहुत पतला होता है।

८) वह अपना सीना भी नहीं फुला सकता छाती का आकार भी बिगड़ा हुआ होता है।

९) सांस छोड़ते समय छाती में घरघराहट की आवाज साफ सुनाई देती है।

१०) बच्चे लकवाग्रस्त हो जाते हैं और आत्मविश्वास खो देते हैं।

११) लगातार चिंतित और भयभीत रहता है।

अस्थमा के कारण – Causes of Asthma

१) अस्थमा होने के कई कारण होते हैं। जलवायु परिवर्तन से एलर्जी, धूल, भोजन, दवाएं, इत्र महत्वपूर्ण कारण हैं।

२) कुछ बच्चों को कपास के रेशे, गेहूं का आटा, पराग, जानवरों के बाल, कवक, कीड़े और तिलचट्टे से भी एलर्जी होती है।

३) गेहूं, अंडे, दूध, चॉकलेट, शर्बत, आलू, मांस, मछली से एलर्जी होती है।

४) अस्थमा शरीर में कुछ रासायनिक तत्वों के टूटने और छाती की मांसपेशियों के कार्य के कारण होता है।

५) एलर्जी वाले पदार्थ, मानसिक तनाव, वायु प्रदूषण, बैक्टीरिया और आनुवंशिकता भी अस्थमा के कारण होते हैं।

६) माता-पिता दोनों को अस्थमा रहें तो बच्चों में अस्थमा होने की संभावना ८५ से १०० होती है।

अस्थमा के लिए घरेलू उपचार – Home Remedies for Asthma

१) दमा के लक्षण उनकें शरीर के सभी अंगों के सुचारू संचालन और शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालने पर ध्यान दिया तो अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।

२) अस्थमा के लक्षण – पेट पर मिट्टी लगाने से पाचन क्रिया में सुधार होता है। कफ को साफ करने और सांस लेने में सुधार के लिए छाती पर मिट्टी का लेप लगाएं।

३) गर्म पानी कि बाफ नाक मे लें। धूप सेंकना। पैरों को गर्म पानी में डुबोएं। इससे छाती में जमा कफ साफ हो जाता है।

४) बच्चों के कमरे में किसी को भी धूम्रपान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। तंबाकू का धुआं अस्थमा को बढ़ाता है। घर का वातावरण मन की शांति के लिए अनुकूल होना चाहिए। जब किसी बच्चे को अस्थमा होने लगे तो माता-पिता डरे नहीं, शांत रहें और उसे धीर दे।

५) आहार बहुत महत्वपूर्ण है। आहार में कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन कम होना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में एसिडिटी हो जाती है। क्षारीय पदार्थ – उदा. फल, पत्तेदार सब्जियां, मुड़े हुए अंकुरित अनाज खाने चाहिए। चावल, चीनी, दही, तले हुए खाद्य पदार्थ कफ को अधिक उत्पादक बनाते हैं। इसलिए उन्हें नहीं देना चाहिए। रात का खाना सोने से दो घंटे पहले लेना चाहिए।

६) बच्चे को भर पेट नहीं खाना चाहिए। थोड़ा भूखा रखो। हरेक घास को धीरे-धीरे चबाके खाना सिखाया जाना चाहिए। बच्चे को दिन भर में पांच से आठ गिलास पानी पीने देना चाहिए। हालांकि खाना खाते समय पानी नहीं देना चाहिए।

७) शहद अस्थमा के लिए अच्छा होता है। कहा जाता है कि शहद की हल्की सी महक भी दमा को कम कर देती है। प्रभाव एक घंटे तक रहता है। शहद (Honey) को दूध या पानी में मिलाकर देने से भी आराम मिलता है।

८) हल्दी अस्थमा के लिए उपयोगी है। कहा जाता है कि शहद की हल्की सी महक भी दमा को कम कर देती है। प्रभाव एक घंटे तक रहता है। शहद (Honey) को दूध या पानी में मिलाकर देने से भी आराम मिलता है।

९) हल्दी अस्थमा के लिए उपयोगी है। एक कप दूध में आधा चम्मच हल्दी उबालकर दिन में तीन बार दें। लहसुन भी एक अच्छी औषधि है। १५ मिनट दूध में लहसुन की एक कली डालकर उबाल लें और दिन में एक बार बच्चे को पिलाएं। कफ से राहत मिलती है। अस्थमा से पीड़ित होने पर सरसों के तेल में कपूर को मिलाकर छाती और पीठ पर मलें। कफ से राहत मिलती है।

निवारक उपाय:

माता-पिता जो स्वयं एलर्जी से पीड़ित हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए। बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में अंगों पर पीने वाले बच्चे को एलर्जी होने की संभावना कम होती है। मांसाहारी भोजन, दालें, मक्का, दूध का दस महीने से कम उम्र के शिशुओं में एलर्जी होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए खाना नहीं देना चाहिए। बच्चों को धूल भरे वायु प्रदूषण, उमस भरे मौसम से दूर रखें।

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अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें घरेलू उपचार करने से पहले अपने नजदीकी डॉक्टर और सही व्यक्ति से सलाह अवश्य लें।

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